संचार क्रांति पर युवा पीढ़ी पर प्रभाव

 

Dr. K.P. Kurrey1*, Dr. (Mrs.) V. Sengupta1, Satish Agrawal2

1Asstt. Prof. Sociology, Govt. T.C.L.P.G. College, Janjgir (C.G.)

2Principal, Mukutdhar Pandey College, Katghora (C.G.)

*Corresponding Author E-mail:

 

सारांश- 

प्रस्तुत शोध संचार क्रांति एवं सामाजिक परिवर्तन विशय से संबंधित है। संचार क्रांति इस सदी की एक महत्वपूर्ण घटना है। सामान्यः संचार का आशय मनुश्य और मनुश्य के बीच भावनात्मक, विचारात्मक और सूचनात्मक स्तर के अंर्तसंबंधो की प्रक्रिया के सतत संचालित होने से है। जिससे हमारे समाज में व्यापक बदलाव आया है। यह संचार क्रांति का ही परिणाम है कि विश्व के किसी भी कोने में घटित घटना क्षण भर में संपूर्ण दुनिया में फैल जाती है।

प्रिंट मिडिया के चमत्कार ने ज्ञान का विस्फोट किया है। सोसल नेटवर्किंग से मनुश्यों के आमने-सामने बैठकर वार्तालाप करने के अवसर नगण्य होते जा रहे है। जिससे एकाकीपन और डिप्रेशन के प्रकरण बढ़ रहे है। हमारे जीवन शैली के तरिकों को भी संचार क्रांति ने बड़ी सीमा तक प्रभावित किया है।

 

शब्द कुंजी:- स्ंाचार क्रांति, युवा पीढ़ी, सामाजिक परिवर्तन, मिडिया।

 

प्रस्तावना

संचार-माध्यम संचार के दो बिंदुओं को जोड़ने वाला घटना है। सम्प्रेशक और श्रोता माध्यम के द्वारा ही जुड़ते है। हेराल्ड लाॅसवेल मानते है कि संचार माध्यमों का प्रमुख कार्य-

1.   सूचना संग्रह,

2.   सूचना प्रसार,

3.   सूचना विश्लेशण,

4.   सामाजिक मुल्यों और ज्ञान का सम्प्रेशण,

5.   मनोरंजन।

 

संचार माध्यम अनादि काल से महत्वपूर्ण रहे है, क्योकि वे संचारक और श्रोता के मध्य सेतु की भूमिका निभाते है। युवा शक्ति किसी भी प्रदेश या देश की सबसे बड़ी अनमोल पूंजी होती है। युवाओं में उत्साह एवं जोश का भंडार रहता है। युवा शक्ति का बेहतर उपयोग कर ही कोई भी प्रदेश एवं देश प्रगति के शिखरों को छू सकता है।

 

युवा शक्ति को सही समय पर संस्कारों में ढालने और उभरी ऊर्जा को सही दिशा मंे प्रवाहित करने के लिए उचित शिक्षण और प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। छ.ग.शासन द्वारा अनेक योजनाए संचालित है-युवा शक्ति इन योजनाओं का लाभ उठाए तथा राज्य का भविश्य संवारने में मददगार बने।

 

युवा ही किसी परिवार समाज, प्रदेश या देश के सुखद भविश्य की बुनियाद होते है। युवावस्था की सही देख भाल उन्हें व्यक्तित्व विकास की सही शिक्षा-दीक्षा, उनके स्वालंबन की समुचित योजनाएॅ बनाकर हम उनकी ऊर्जा का उपयोग सही दिशा में कर सकते है।

 

महत्वः-

टेलीविजन, कम्प्यूटर, इन्टरनेट ने एक नई क्रांति पैदा कर दी है इसके कारण दुनिया सही मायने में ग्लोबल विलेज की कल्पना को साकार होते हुए देखती है। पूरा ब्रम्हाण्ड पूरी दुनिया सिमटकर उस व्यक्ति और समाज के नियत्रण में आ गई है। इंटरनेट से घर बैठे पूरी दुनिया से वार्तालाप व्यवसाय और संपर्क संभव हो सकता है।

 

शिक्षा सबसे सशक्त हथियार है, जिससे दुनिया को बदला जा सकता है- नेल्सन मंडेला

 

किसी भी राज्य एवं देश की आधार शिला युवा होते है। युवाओं पर ही राज्य के विकास और भविश्य की संभावनाए निर्भर होती है। उन्हें भविश्य का कर्णधार भी माना गया है। वर्तमान परिदृश्य में युवाओं की सक्रीय भूमिका से सकारात्मक परिणाम सामने आये है। युवा जोश और उत्साह को सही दिशा देकर राज्य विकास की गति बढ़ाई जा सकती है।

 

छ.ग. के युवा विभिन्न क्षेत्रों में पूरे देश में राज्यों की एक अलग पहचान बना रहे है। युवाओं के इन उल्लेखनीय कार्यों के फलस्वरूप छ.ग.अपने साथ गठित अन्य राज्यों से विकास की दौड़ में आगे निकल गया है।

 

उद्धेश्यः-

ऽ   संचार का उद्धेश्य समाज का सकारात्मक परिवर्तन होना चाहिए।

ऽ   वर्तमान में मिडिया से जुड़े सर्वाधिक जन युवा है।

ऽ   परिवार में बच्चों, युवाओं में संचार माध्यमों के प्रचार से पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना।

ऽ   संचार से जुड़े होने के अभिप्रेरित कारकों का पता लगाना।

ऽ   संचार के माध्यम व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक समस्याओं के निदान एवं विकास के लिए सहायक है।

 

परिकल्पनाः-

ऽ   संचार माध्यम एक आर्थिक बोझ रूपि समस्या है।

ऽ   संचार शिक्षा के व्यापक प्रचार-प्रसार, समाचार पत्रों की व्यापक संख्या तथा जनशिक्षा एवं जनदर्शन की विभिन्न साधन होने के बाद भी आवश्यक है।

ऽ   क्या आधुनिक युग प्रौद्योगिकी, समाजीकरण का युग है?

 

क्या देश के विकास को गति देने मंें संचार के माध्यमों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

 

संचार क्रांति के प्रभावः-

संचार का अर्थ है अपनी भावनाओं, विचारों, आवेगों को दूसरों तक प्रेशित करना संचार जीवन का एक आवश्यक अंग है, मानव आदि काल से अपने संदेश एवं सूचनाओं को संप्रेशित करने के लिए संचार माध्यमों का सहारा लेता रहा है। आधुनिक युग में सूचना प्रोद्योगिकी में हुए अभूत पूर्व प्रगति ने संसार को अत्यंत सहज और तीव्र बना दिया है और इस क्षेत्र में निरंतर जो प्रगति हो रही है उसके लिए संचार क्रांति शब्द का प्रयोग किया जाने लगा है, आज यह बात कही जा रही है कि पहले के पिछड़े हुए देश वे थे, जहाॅं औद्योगिक क्रांति नहीं हुई थी और भविश्य में पिछड़े हुए देश वे होंगे जो संचार क्रांति से अछूते रह जाएगें।

 

सकारात्मक प्रभावः-

ऽ   इससे एक विश्व एक गांव की कल्पना साकार हो उठी है।

ऽ   लोगों के बीच सांस्कृतिक एवं भौगोलिक दूरी घटी है।

ऽ   एयरलाइंस एवं रेल्वे में संचार माध्यमों की सहायता से त्वरित आरक्षण करना संभव हो सकता है। सुदूर स्थित बैंकों में लेन देन संभव हो सकता है।

ऽ   व्यापार का नया स्वरूप एवं रोजगार के नए अवसर (ई-कामर्स, कम्प्यूटर आपरेटर, साफ्टवेर डेव्हलेपर) बने है।

ऽ   टेली मेडिसिन एवं सर्जरी का प्रयोग चिकित्सा जगत में होने लगा है।

 

नकारात्मक प्रभावः-

इससे भौतिकतावाद को बढ़ावा मिलता है।

ऽ   नव साम्राज्यवाद अपना पैर पसार रहा है।

ऽ   आत्म केन्द्रित एवं स्वार्थी प्रवृźिा का प्रचलन बढ़ रहा है।

ऽ   कम्प्यूटर के माध्यम से नये अपराध सामने आये है(साइबर क्राइम)

 

निश्कर्षः-

संचार माध्यमों के द्वारा पड़ने वाले उभय पक्ष के प्रभावों से हमें सीख लेना होगा। यदि हम अपनी भावी पीढ़ी को सुखी, समृद्ध, वैभवशाली, तकनीकी ज्ञान से परिपूर्ण एवं मानवता से परिपूर्ण बनाना चाहते है तो हमें संचार माध्यमों की सहायता से नये ़क्षेत्रों जैसे खनिज संसाधन प्रजाति विकास, आधारभूत संरचना को भी महत्व प्रदान करना होगा इसके माध्यम से 21वीं सदी में हम बेहतर समाज का गठन कर पायेंगे इसके लिए संचार माध्यमों के दुरुपयोग को रोका जाना आवश्यक है।

 

कम्प्यूटर की खोज और सूचना प्रौद्योगिकी का विकास 20वीं शताब्दी की सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। प्रगति और विकास के साधन के रूप में सूचना प्रौद्योगिकी की भूमिका व्यापक रूप से स्वीकार की गई है। उम्मीद है कि इसके प्रयोग से मानव को बड़े सामाजिक  और आर्थिक लाभ होंगे तथा विकास की प्रक्रिया में तेजी आयेगी।

 

सन्दर्भ ग्रन्थ सूची

ऽ   Barie, David, ‘The Process of Communication’, New York 1-10LT Rinehart and Winston, 1960.

ऽ   Wrigh, C.R. mass communication- A Sociological prespective, New York, Random House – 1963 P.13.

ऽ   मीडियाः नया दौर नयी चुनौतियां, लेखक संजय द्विवेदी प्रकाशक- यष पब्लिकेशन्स, दिल्ली

ऽ   सनसनपाल डी. एन., (2001) सूचना प्रोद्योगिकी और उच्च शिक्षा

ऽ   गोड़ प्रकाश (1999)- कम्प्यूटर अनुप्रयोग, रोजगार एवं नये आयाम।

 

 

 

Received on 04.06.2015       Modified on 12.06.2015

Accepted on 25.06.2015      © A&V Publication all right reserved

Int. J. Ad. Social Sciences 3(2): April-June, 2015; Page 89-91