Author(s):
अंजली कुमारी, ऋचा सिंह
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DOI:
10.52711/2454-2679.2025.00029
Address:
अंजली कुमारी1, ऋचा सिंह2
1शोधाथीर्, राजनीति विज्ञान, नीलाम्बर पीताम्बर विश्वविद्यालय, मेदिनीननगर, पलामू, झारखण्ड, भारत।
2शोध निर्देशिका, असिस्टेंट प्रोफेसर, विभागाध्य़क्ष राजनीति विज्ञान विभाग, जी.एल.ए. कॉलेज, नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय, मेदिनीनगर, पलामू, झारखण्ड, भारत।
*Corresponding Author
Published In:
Volume - 13,
Issue - 4,
Year - 2025
ABSTRACT:
वर्तमान राजनीति लोकतन्त्र की प्रथम पाठशाला है। लोकतन्त्र मूलतः विकेन्द्रीकरण पर आधारित शासन व्यवस्था होती है। शासन की ऊपरी सतहों पर (केन्द्रीय तथा राज्य) कोई भी लोकतन्त्र तब तक सफल नहीं हो सकता. जब तक कि निचले स्तर पर लोकतांत्रिक मान्यतायें एवं मूल्य शक्तिशाली नहीं हो। लोकतान्त्रिक राजनीतिक व्यवस्था में पंचायतीराज ही वह माध्यम है, जो शासन को सामान्य जन के दरवाजे तक लाता है। पंचायतीराज व्यवस्था में स्थानीय लोगों की स्थानीय शासन कार्यों में अनवरत रूचि बनी रहती है, क्योंकि वे अपनी स्थानीय समस्याओं का स्थानीय पद्धति से लागू करते एवं समाधान भी कर सकते हैं। इस प्रकार पंचायतीराज संस्थायें स्थानीय जनमानस को शासन कार्य में भागीदार एवं हिस्सेदार बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है और उसी भागीदारी की प्रक्रिया के माध्यम से लोगों की प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से राजनीति का प्रशिक्षण स्वत ही प्राप्त होता है। वर्तमान पंचायतीराज में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण प्राप्त कर के ये स्थानीय जनप्रतिनिधि ही कालान्तर में विधान सभा एवं राज सभा एवं संसद का प्रतिनिधित्व कर राष्ट्र को नेतृत्व प्रदान करते है।
Cite this article:
अंजली कुमारी, ऋचा सिंह. पंचायती राज व्यवस्था और महिलाएं. International Journal of Advances in Social Sciences. 2025; 13(4):186-8. doi: 10.52711/2454-2679.2025.00029
Cite(Electronic):
अंजली कुमारी, ऋचा सिंह. पंचायती राज व्यवस्था और महिलाएं. International Journal of Advances in Social Sciences. 2025; 13(4):186-8. doi: 10.52711/2454-2679.2025.00029 Available on: https://www.ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2025-13-4-4
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