Author(s):
नेहा इरशाद खान, निरूपमा सिंह
Email(s):
nehabhu201617@gmail.com
DOI:
10.52711/2454-2679.2026.00011
Address:
नेहा इरशाद खान1*, निरूपमा सिंह2
1शोधछात्रा, समाजशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर-प्रदेश, भारत ।
2डी0 ए0 वी 0 डिग्री कॉलेज, समाजशास्त्र विभाग, लखनऊ, उत्तर-प्रदेश, भारत ।
*Corresponding Author
Published In:
Volume - 14,
Issue - 1,
Year - 2026
ABSTRACT:
भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प कला और कपड़ा उद्योग में बुनकर समुदाय की महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विशेष रूप से मुस्लिम तथा अन्य परंपरागत बुनकर परिवारों में महिलाओं की भागीदारी घरेलू आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक विभिन्न स्तरों पर दिखाई पड़ती है। वैश्वीकरण, तकनीकी उद्विकास, बाजार संरचना में परिवर्तन और सरकारी योजनाओं के प्रभाव स्वरूप बुनकर महिलाओं की सामाजिकऔर आर्थिक स्थिति में विशिष्ट परिवर्तन किया गया है। यह शोध पत्र बुनकर महिलाओं की वर्तमान स्थिति चुनौतियों और उभरते अवसरों का विश्लेषण है।भारत का हथकरघा क्षेत्र सांस्कृतिक विरासत का खजाना है, जो सदियों पुरानी पारंपरिक शिल्प कला और बुनाई तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है। हाथ से बने हुए वस्त्र केवल कपड़े ही नहीं वह दृ कहानीकार हैं जो विभिन्न क्षेत्रों के इतिहास, संस्कृति और कलात्मकता को एक साथ पिरोते हैं। हर वस्तु चाहे वह जीवंत बनारसी साड़ी हो या जटिल कांजीवरम रेशम हो या मिट्टी की पशमीना शॉल हो भारत के विविध समुदायों और परंपराओं का सार समेटे हुए हैं। हालांकि अपने सांस्कृतिक महत्व के अलावा भारतीय हथकरघा देश के आर्थिक ढांचे में खासकर ग्रामीण इलाकों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।हथकरघा उद्योग भारत में रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है जो लाखों बुनकरों का कारीगरों को आजीविका प्रदान करता है। जिसमें से अधिकांश महिलाएं हैं। यह क्षेत्र ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देता है और पीढ़ीयो से चले आ रहे पारंपरिक ज्ञान को जीवित रखना है।
Cite this article:
नेहा इरशाद खान, निरूपमा सिंह. बुनकर महिलाओं की बदलती सामाजिक-आर्थिक स्थितिःएक समाजशास्त्री विश्लेषण. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(1):45-8. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00011
Cite(Electronic):
नेहा इरशाद खान, निरूपमा सिंह. बुनकर महिलाओं की बदलती सामाजिक-आर्थिक स्थितिःएक समाजशास्त्री विश्लेषण. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(1):45-8. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00011 Available on: https://www.ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2026-14-1-11
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