Author(s): प्रियांकी गजभिए

Email(s): priyankirjn7910@gmail.com

DOI: 10.52711/2454-2679.2026.00013   

Address: प्रियांकी गजभिए
सहायक प्राध्यापक इतिहास, शास. डॉ. बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर, स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डोंगरगांव, छत्तीसगढ़, भारत ।
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 14,      Issue - 1,     Year - 2026


ABSTRACT:
हर युग में इतिहास संस्कृतियों का साक्षी बना रहता है। उसके बीते कालखंडों में आती जाती संस्कृतियों के बीच वह तालमेल बिठाए रहता है । भारत को संस्कृतियों का अजायबघर कहा जाता है, क्योंकि इसकी संस्कृति की मूल भावना वसुधैव कुटुंबकम पर आधारित है । चीन ने अपनी सुरक्षा तथा बाह्य आक्रमणकारियों से बचाव हेतु 300 ईसा पूर्व अपनी सरहदों पर एक दीवार खड़ी कर दी जिसे चीन की महान दीवार कहा जाता है। परंतु भारत ने अपनी सरहदों को सदैव मुक्त रखा। यह प्राचीन भारतीय संस्कृति की मौलिक सोच है कि सीखने की कोई सरहद नहीं उत्साह हमेशा दिल से हो । ज्ञान जहां से मिले तुम खोल दो सब खिड़कियां । जरूरी नहीं कि हर एक ज्ञान गीता कुरान बाइबल से हो। ऐसी समन्वयकारी भावनाओं से युक्त भारतभूमि में इस्लाम के आगमन पश्चात एक नवीन सांस्कृतिक समन्वय आरंभ होता है, जिसे इंडो-इस्लामिक संस्कृति कहा गया । इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान में दोनों ही धर्म एक दूसरे को प्रभावित करते हैं, तथा एक दूसरे से प्रभावित होते हैं। किंतु यह भारत में आए अन्य बाह्य आक्रमणकारियों जैसे ईरानी, यूनानी, शक, कुषाण के समान भारत की संस्कृति में समाहित नहीं हुए, अपितु दोनों संस्कृतियों के समन्वय सम्मिश्रण के बावजूद भी हिंदू तथा मुसलमान अपनी विशिष्टता आज तक बनाए रखे हैं। मध्यकालीन सूफी आंदोलन एवं भक्ति आंदोलन के संतो द्वारा हिंदुओं तथा मुसलमानों के मध्य सामंजस्य स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिंदू यदि इस्लाम से प्रभावित हुए तो उन्होंने अनेक क्षेत्रों में उन्हें प्रभावित भी किया। टाइटस महोदय का यह कथन महत्वपूर्ण है कि - ’’सब कुछ कहने के बाद भी इसमें संदेह नहीं है कि हिंदू धर्म ने जो अभी तक अपने सुनिश्चित मार्ग पर आश्चर्यजनक आस्था एवं विश्वास के साथ अग्रसर है, इस्लाम के ऊपर, अपने इस्लामी प्रभाव की अपेक्षा, कहीं अधिक प्रभाव उत्पन्न किया था।’’


Cite this article:
प्रियांकी गजभिए. भारत की सहिष्णु संस्कृति में इंडो-इस्लामिक संस्कृतियों का समन्वय (ऐतिहासिक परिपेक्ष्य में). International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(1):56-2. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00013

Cite(Electronic):
प्रियांकी गजभिए. भारत की सहिष्णु संस्कृति में इंडो-इस्लामिक संस्कृतियों का समन्वय (ऐतिहासिक परिपेक्ष्य में). International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(1):56-2. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00013   Available on: https://www.ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2026-14-1-13


संदर्भ सूची :-
1.    के.सी. श्रीवास्तव, प्राचीन भारत का इतिहास तथा संस्कृति, पृष्ठ क्र. 875 -79, 8832.   
2.    आशीर्वादी लाल श्रीवास्तव, मध्यकालीन भारतीय संस्कृति, पृष्ठ क्र. 220-31
3.    डॉ राजीव दुबे, भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का विकास, पृष्ठ क्र. 110-13
4.    वी.डी. महाजन, दिल्ली सल्तनत का इतिहास, पृष्ठ क्र. 366-71
5.    हरिश्चंद्र वर्मा, मध्यकालीन भारत (1540 1761 ई.), पृष्ठ क्र 543-44
6.    डॉ विश्वेश्वर स्वरूप भार्गव, डॉ श्रीमती नीलिमा भार्गव, मध्यकालीन भारतीय इतिहास (1000 से 1761 ई) पृष्ठ क्रमांक 345-51 
7.    रामशरण शर्मा, पूर्व मध्यकालीन भारत का सामंती समाज और संस्कृति, पृष्ठ क्रमांक 36
8.    डॉ सत्यनारायण दुबे, यूनिफाइड हिस्ट्री, पृष्ठ क्रमांक 220 -23
9.    गूगल आरती श्रीवास्तव
10.    Grok AI

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