ABSTRACT:
शिक्षा मानव के लिए अति आवश्यक अंग हैं। बिना शिक्षा के मानव पशु की भाँति होता है। शिक्षा के स्वरूप एवं प्रणाली में कई विषमताएँ देखने को मिलती हैं जिन्हें योग शिक्षा द्वारा दूर कर श्रेष्ठ नागरिक तैयार किये जा सकते हैं। यदि भारत को पुनः विश्व गुरु बनना है तो उसे अपनी शिक्षा प्रणाली मे सुधार करना चाहिए।
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राजेश त्रिपाठी. भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली स्वरूप सुधार और योग. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(1):36-8. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00009
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राजेश त्रिपाठी. भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली स्वरूप सुधार और योग. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(1):36-8. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00009 Available on: https://www.ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2026-14-1-9
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