Author(s): राजेश त्रिपाठी

Email(s): pksahu901@gmail.com

DOI: 10.52711/2454-2679.2026.00009   

Address: राजेश त्रिपाठी
योग विभाग, गोविन्द गुरू जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा, राजस्थान, भारत।
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 14,      Issue - 1,     Year - 2026


ABSTRACT:
शिक्षा मानव के लिए अति आवश्यक अंग हैं। बिना शिक्षा के मानव पशु की भाँति होता है। शिक्षा के स्वरूप एवं प्रणाली में कई विषमताएँ देखने को मिलती हैं जिन्हें योग शिक्षा द्वारा दूर कर श्रेष्ठ नागरिक तैयार किये जा सकते हैं। यदि भारत को पुनः विश्व गुरु बनना है तो उसे अपनी शिक्षा प्रणाली मे सुधार करना चाहिए।


Cite this article:
राजेश त्रिपाठी. भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली स्वरूप सुधार और योग. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(1):36-8. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00009

Cite(Electronic):
राजेश त्रिपाठी. भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली स्वरूप सुधार और योग. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(1):36-8. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00009   Available on: https://www.ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2026-14-1-9


संदर्भ सूची -
1. शर्मा श्रीराम आचार्य (1963): आत्म विश्वास की शक्ति, अखंड ज्योति संस्थान, मथुरा  26 अंक 12,5 ।
2. मुनि धर्मेश (2002) जीवन विज्ञान की रूपरेखा, जैन विश्व भारती संस्थान लाडनुं (राज.)।
3. नारायण स्वामी उपोद्घात, वैदिक साहित्य प्रचारणी सभा, दिल्ली।
4. भोगल आर. एस., योग और मानसिक स्वास्थ्य कैवल्यधाम, लोनावाला पूणे (महाराष्ट्र)।
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