ABSTRACT:
यह शोध-पत्र “चीन की विशेषताओं से युक्त समाजवाद” की अवधारणा का समग्र एवं समीक्षात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है। इसमें समाजवाद के शास्त्रीय मार्क्सवादी सिद्धांतों, माओ त्से तुंग के वैचारिक योगदान तथा देंग शियाओपिंग द्वारा प्रतिपादित सुधारवादी दृष्टिकोण के विकासक्रम का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि किस प्रकार चीन ने अपनी ऐतिहासिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समाजवाद की पुनर्व्याख्या की। शोध-पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि चीनी समाजवाद ने बाजार अर्थव्यवस्था के कुछ तत्वों को अपनाते हुए भी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व और समाजवादी लक्ष्यों को बनाए रखा। आर्थिक सुधारों के परिणामस्वरूप चीन ने तीव्र विकास, गरीबी उन्मूलन और वैश्विक प्रभाव में उल्लेखनीय प्रगति की है। साथ ही, इस मॉडल के अंतर्निहित विरोधाभासों—जैसे बढ़ती असमानता, श्रमिक अधिकारों की सीमाएँ और नागरिक स्वतंत्रताओं पर नियंत्रण—का आलोचनात्मक मूल्यांकन भी किया गया है। अंततः यह शोध यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि “चीन की विशेषताओं से युक्त समाजवाद” न तो पारंपरिक समाजवाद का शुद्ध रूप है और न ही पूर्ण पूँजीवादी व्यवस्था, बल्कि यह एक प्रयोगात्मक, परिस्थितिजन्य और निरंतर विकसित होने वाली वैचारिक संरचना है, जो समकालीन राजनीतिक सिद्धांत के अध्ययन में विशेष महत्व रखती है।
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मोहम्मद आकिफ तौफ़ीक. चीन की विशेषताओं से युक्त समाजवाद की अवधारणा का समीक्षात्मक अध्ययन. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(2):117-2. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00024
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मोहम्मद आकिफ तौफ़ीक. चीन की विशेषताओं से युक्त समाजवाद की अवधारणा का समीक्षात्मक अध्ययन. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(2):117-2. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00024 Available on: https://www.ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2026-14-2-9
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