ABSTRACT:
राम मनोहर लोहिया आधुनिक भारत के प्रमुख समाजवादी चिंतकों में से एक थे, जिन्होंने भारतीय समाज की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रस्तुत किए। उनके विचारों का मुख्य उद्देश्य एक ऐसे समाज की स्थापना करना था जिसमें समानता, न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ किया जा सके। प्रस्तुत शोध पत्र में लोहिया के प्रमुख विचारों—लोकतांत्रिक समाजवाद, चौखम्बा राज्य और सप्तक्रांति—का विश्लेषणात्मक एवं समीक्षात्मक अध्ययन किया गया है। लोकतांत्रिक समाजवाद की अवधारणा के माध्यम से लोहिया ने समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानताओं को समाप्त करने तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से समाजवादी व्यवस्था स्थापित करने पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने चौखम्बा राज्य की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए शासन व्यवस्था को चार स्तरों—ग्राम, जिला, प्रांत और केंद्र—में विभाजित करने का सुझाव दिया, ताकि सत्ता का विकेंद्रीकरण हो सके और आम जनता की भागीदारी बढ़ सके। इसी क्रम में सप्तक्रांति की अवधारणा के माध्यम से लोहिया ने समाज में मौजूद सात प्रकार की असमानताओं—जैसे स्त्री-पुरुष असमानता, जातिगत भेदभाव, आर्थिक विषमता तथा युद्ध की प्रवृत्ति—के विरुद्ध व्यापक सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि लोहिया के विचार केवल सैद्धांतिक नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक न्याय, लोकतंत्र और समानता की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण वैचारिक आधार प्रदान करते हैं। वर्तमान समय में जब समाज में असमानता और सामाजिक विभाजन की समस्याएँ अब भी मौजूद हैं, तब लोहिया के विचारों की प्रासंगिकता और भी अधिक दिखाई देती है।
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मोहम्मद आकिफ तौफ़ीक. राम मनोहर लोहिया के लोकतांत्रिक समाजवाद, चौखम्बा राज्य और सप्तक्रांति की अवधारणा का समीक्षात्मक अध्ययन. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(2):123-0. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00025
Cite(Electronic):
मोहम्मद आकिफ तौफ़ीक. राम मनोहर लोहिया के लोकतांत्रिक समाजवाद, चौखम्बा राज्य और सप्तक्रांति की अवधारणा का समीक्षात्मक अध्ययन. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(2):123-0. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00025 Available on: https://www.ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2026-14-2-10
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